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घोषा

स्त्री-रत्न एवं विदुषियाँ

अन्य नाम: घोषा, घोषा काक्षीवती

ब्रह्मवादिनीऋषिकाऋग्वेद

घोषा वैदिक काल की ऋषिका और ब्रह्मवादिनी थीं, जो ऋग्वेद के दो सूक्तों की द्रष्टा हैं।

उनके पिता कक्षीवान और पितामह दीर्घतमस थे, जो स्वयं ऋग्वेद के मंत्रद्रष्टा थे।

कहा जाता है कि घोषा को एक चर्म-रोग था, जिसके कारण वे विवाह न कर सकीं और पिता के घर रहीं। अश्विनीकुमारों की आराधना से वे रोगमुक्त हुईं तथा युवावस्था और वर प्राप्त किया। ऋग्वेद के दशम मंडल के 39वें और 40वें सूक्त उनकी रचना माने जाते हैं; उनके पुत्र सुहस्त्य भी ऋषि हुए।

नाते-रिश्ते

  • पिता: कक्षीवान
  • पितामह: दीर्घतमस
  • पुत्र: सुहस्त्य

प्रसिद्ध कथन

हे अश्विनी कुमारों! तुम्हारी ओर आकर्षित होकर मैं, राजा की पुत्री घोषा, तुमसे प्रार्थना करती हूँ। (ऋग्वेद 10.40 – भावानुवाद)

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स्रोत: ऋग्वेद