मैत्रेयी
स्त्री-रत्न एवं विदुषियाँ
अन्य नाम: मैत्रेयी
मैत्रेयी वैदिक काल की प्रसिद्ध ब्रह्मवादिनी और दार्शनिक थीं, जो अमरत्व के ज्ञान की जिज्ञासा के लिए जानी जाती हैं।
वे महर्षि याज्ञवल्क्य की पत्नी थीं; याज्ञवल्क्य की दूसरी पत्नी कात्यायनी थीं।
जब याज्ञवल्क्य वानप्रस्थ लेने से पूर्व अपनी संपत्ति पत्नियों में बाँटने लगे, तब मैत्रेयी ने पूछा—"यदि यह समस्त पृथ्वी धन से भरी मेरी हो जाए, तो क्या मैं अमर हो जाऊँगी?" याज्ञवल्क्य ने कहा "नहीं"; तब उन्होंने उस ज्ञान की याचना की जो अमर करता है। बृहदारण्यक उपनिषद (2.4 तथा 4.5) में याज्ञवल्क्य का उन्हें दिया आत्म-ब्रह्म का उपदेश ("आत्मा वा अरे द्रष्टव्यः...") प्रसिद्ध है, जो भारतीय दर्शन की श्रेष्ठतम शिक्षाओं में गिना जाता है।
नाते-रिश्ते
- पति: याज्ञवल्क्य
- सौतन: कात्यायनी
प्रसिद्ध कथन
यदि यह समस्त पृथ्वी धन से भरी मेरी हो जाए, तो क्या मैं अमर हो जाऊँगी? (बृहदारण्यक उपनिषद 2.4 – भावानुवाद)
जो मुझे अमर न बनाए, उससे मैं क्या करूँ? वही ज्ञान मुझे बताइए। (भावानुवाद)
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स्रोत: बृहदारण्यक उपनिषद