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कुमारसंभव

ग्रंथ

अन्य नाम: कुमारसम्भव

रचयिता / कर्ता: कालिदास

महाकाव्यशिवपार्वतीकाव्य

कुमारसंभव कालिदास का महाकाव्य है जो शिव और पार्वती के विवाह तथा उनके पुत्र कुमार (कार्तिकेय) के जन्म की कथा कहता है।

रचयिता कालिदास हैं। ग्रंथ परंपरा में आठ सर्गों में उपलब्ध है, जिनमें प्रथम सात सर्ग कालिदास की रचना माने जाते हैं।

विषय तपस्या, प्रेम, विवाह और दाम्पत्य का है। यह महाकाव्य-शैली का उत्कृष्ट नमूना माना जाता है और इसकी प्रकृति-वर्णना तथा रस-योजना संस्कृत काव्य में अद्वितीय मानी जाती है।

प्रसिद्ध कथन

अस्त्युत्तरस्यां दिशि देवतात्मा हिमालयो नाम नगाधिराजः। (कुमारसंभव, प्रथम सर्ग)

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स्रोत: कुमारसंभव (कालिदास)