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मेघदूत

ग्रंथ

अन्य नाम: मेघदूतम्

रचयिता / कर्ता: कालिदास

खंडकाव्यसंदेश-काव्यकाव्यविरह

मेघदूत कालिदास का प्रसिद्ध खंडकाव्य (संदेश-काव्य) है, जिसमें एक यक्ष वनवास में रहकर मेघ को दूत बनाकर अपनी पत्नी को प्रेम-संदेश भेजता है।

रचयिता कालिदास हैं। ग्रंथ मंदाक्रांता छंद में रचित है और इसे संदेश-काव्य परंपरा का आदर्श माना जाता है।

विषय विरह, प्रकृति-वर्णना और प्रेम-संदेश है। मेघदूत की प्रकृति-चित्रण और भाव-गहराई के कारण इसकी अनुकरण-परंपरा अनेक भाषाओं में चली और यह संस्कृत के सर्वाधिक प्रिय काव्यों में गिना जाता है।

प्रसिद्ध कथन

कश्चित्कान्ताविरहगुरुणा स्वाधिकारात्प्रमत्तः शापेनास्तंगमितमहिमा वर्षभोग्येण भर्तुः। (मेघदूत, प्रथम श्लोक)

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स्रोत: मेघदूत (कालिदास)