रघुवंश
ग्रंथ
अन्य नाम: रघुवंशम्
रचयिता / कर्ता: कालिदास
रघुवंश महाकाव्य कालिदास की सर्वाधिक प्रसिद्ध कृतियों में से एक है, जिसमें सूर्यवंश (रघुवंश) के राजाओं की कथा चली आती है। यह उच्च कोटि के संस्कृत महाकाव्य का आदर्श उदाहरण माना जाता है।
इसके रचयिता महाकाव्यकार कालिदास हैं, जो गुप्त-काल के आसपास हुए माने जाते हैं। ग्रंथ उन्नीस सर्गों में है और दिलीप, रघु, अज, दशरथ तथा राम की कथा क्रम से वर्णित है।
विषय राजधर्म, त्याग, प्रेम और आदर्श जीवन का है। रघुवंश संस्कृत काव्यशास्त्र में महाकाव्य के लक्षणों का सर्वोत्तम उदाहरण माना जाता है और भारतीय काव्य-परंपरा का शिखर माना जाता है।
प्रसिद्ध कथन
वागर्थाविव संपृक्तौ वागर्थप्रतिपत्तये। जगतः पितरौ वन्दे पार्वतीपरमेश्वरौ॥ (रघुवंश, प्रथम सर्ग)
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स्रोत: रघुवंश (कालिदास)