चूड़ाकरण (मुंडन)
संस्कार एवं श्राद्ध-विधि
अन्य नाम: चूड़ाकरण, मुंडन, चौलकर्म, चूड़ाकर्म
चूड़ाकरण या मुंडन संस्कार में शिशु के बाल पहली बार काटे जाते हैं। इसमें शिखा अर्थात् चोटी को छोड़ दिया जाता है।
यह प्रायः प्रथम या तृतीय वर्ष में, शुभ मुहूर्त में किया जाता है। बाल काटने के बाद शिशु का स्नान, पूजन और मंगल आशीर्वाद होता है।
इसका आधार गृह्यसूत्र और स्मृतियाँ हैं। इसका महत्व अहंकार तथा पूर्व-संस्कारों के त्याग और शिखा के माध्यम से आध्यात्मिक ऊर्जा की रक्षा से जुड़ा है।
प्रसिद्ध कथन
हे ईश्वर! केश-त्याग से पूर्व-संस्कारों के दोष दूर हों और शिखा के साथ आयु तथा ओज बना रहे। (भावानुवाद)
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स्रोत: गृह्यसूत्र