निष्क्रमण संस्कार
संस्कार एवं श्राद्ध-विधि
अन्य नाम: निष्क्रमण, निष्क्रमणम्
निष्क्रमण का अर्थ है बाहर निकलना। इस संस्कार में शिशु को पहली बार घर से बाहर लाकर सूर्य और दिशाओं का दर्शन कराया जाता है।
यह प्रायः जन्म के चौथे मास में, सूर्य के प्रकाश में किया जाता है। माता या परिवार का वयोवृद्ध शिशु को गोद में लेकर बाहर लाता है और सूर्यदेव तथा दिशाओं की वंदना करता है।
इसका आधार पारस्कर गृह्यसूत्र और मनुस्मृति हैं। इसका महत्व शिशु को प्रकृति, सूर्य-शक्ति और बाहरी संसार से परिचित कराने में है।
प्रसिद्ध कथन
तच्चक्षुर्देवहितं पुरस्ताच्छुक्रमुच्चरत्। पश्येम शरदः शतं जीवेम शरदः शतम्॥
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स्रोत: गृह्यसूत्र