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अन्नप्राशन संस्कार

संस्कार एवं श्राद्ध-विधि

अन्य नाम: अन्नप्राशन, अन्नप्राशनम्

संस्कारगृह्यसूत्रअन्नसंतान

अन्नप्राशन वह संस्कार है जिसमें शिशु को पहली बार अन्न अर्थात् ठोस भोजन खिलाया जाता है। यह शिशु के अन्नमय जीवन की शुरुआत है।

यह प्रायः छठे मास में किया जाता है, बालिकाओं के लिए पाँचवें मास में भी। विधि में हवन और पूजन के बाद शिशु को मंत्रोच्चार के साथ खीर या अन्न का प्राशन कराया जाता है तथा शुभ वस्तुओं का स्पर्श कराया जाता है।

इसकी विधि गृह्यसूत्रों और स्मृतियों में वर्णित है। इसका महत्व शिशु के आरोग्य, अन्न की पवित्रता और बुद्धि-विकास की कामना से जुड़ा है।

प्रसिद्ध कथन

ॐ अन्नपतेऽन्नस्य नो देह्यनमीवस्य शुष्मिणः। प्र प्रदातारं तारिष ऊर्जं नो धेहि द्विपदे चतुष्पदे॥

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नामकरण संस्कारनिष्क्रमण संस्कारचूड़ाकरण (मुंडन)उपनयन संस्कारगृह्यसूत्र

स्रोत: गृह्यसूत्र