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काकभुशुंडि

रामायण एवं रामचरितमानस

अन्य नाम: काकभुसुंडि, भुशुंडि

काकरामभक्तउत्तरकाण्डकाकभुशुंडि संवाद

काकभुशुंडि राम के परम भक्त और ब्रह्मज्ञानी थे; वे काक (कौए) के शरीर में रहते हैं, अतः 'काकभुशुंडि' कहलाए। रामचरितमानस के उत्तरकाण्ड में वे गरुड़ को राम-कथा और भक्ति-तत्त्व सुनाते हैं — यह प्रसंग 'काकभुशुंडि संवाद' कहलाता है।

परंपरा के अनुसार उन्होंने अनेक जन्म धारण किए और शिव तथा राम के उपदेश से ज्ञान प्राप्त किया; उन्हें चिरंजीवी और सर्वज्ञ माना जाता है।

उनका जीवन यह सिद्ध करता है कि जाति या शरीर भक्ति में बाधक नहीं; वे 'काक' शरीर में भी ब्रह्म-ज्ञान और राम-भक्ति में स्थित रहे।

नाते-रिश्ते

  • श्रोता: गरुड़
  • आराध्य: श्रीराम

पूर्वजन्म एवं प्रारब्ध

पूर्वजन्मों में अनेक योनियाँ धारण कीं; शिव-राम उपदेश से ज्ञानी बने

प्रसिद्ध कथन

गरुड़ से: "हे गरुड़, राम-कथा का श्रवण करो; भगवान की कथा सुनने से ही संसार-सागर पार होता है।" (भावानुवाद)

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स्रोत: रामचरितमानस – उत्तरकाण्ड (काकभुशुंडि संवाद)