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हनुमान चालीसा (द्वितीय दोहा)

रोज़ का श्लोक

अन्य नाम: बुद्धिहीन तनु जानिके

हनुमानतुलसीदासभक्ति

अर्थ — अपने शरीर को बुद्धिहीन जानकर मैं पवन-पुत्र हनुमान का स्मरण करता हूँ; हे हनुमान ! मुझे बल, बुद्धि और विद्या दो तथा क्लेश और विकार दूर करो।

यह हनुमान चालीसा का दूसरा दोहा है। इसमें तुलसीदास जी अपनी अल्पता स्वीकार करते हुए हनुमान जी से बल, बुद्धि और विद्या की प्रार्थना करते हैं।

श्लोक

बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुधि बिद्या देहु मोहिं हरहु कलेस बिकार॥

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स्रोत: हनुमान चालीसा