हनुमान चालीसा (प्रारंभिक दोहा)
रोज़ का श्लोक
अन्य नाम: श्रीगुरु चरन सरोज रज
अर्थ — श्रीगुरु के चरण-कमलों की धूल से अपने मन-रूपी दर्पण को स्वच्छ करके, मैं श्रीरघुवीर के निर्मल यश का वर्णन करता हूँ, जो चारों फल (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष) देने वाला है।
यह हनुमान चालीसा का प्रारंभिक दोहा है, जिसे तुलसीदास जी ने रचा। यह गुरु-वंदना और श्रीराम के यश-गान से आरम्भ होता है।
श्लोक
श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि॥
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स्रोत: हनुमान चालीसा