निषादराज गुह
रामायण एवं रामचरितमानस
अन्य नाम: गुह, निषादराज
गुह निषादों के राजा और श्रृंगवेरपुर के शासक थे। वे राम के परम मित्र और भक्त थे।
वनवास के आरंभ में राम, सीता और लक्ष्मण गुह के नगर पहुँचे; गुह ने उनका भक्ति-भाव से स्वागत किया और अपनी नाव से उन्हें गंगा पार कराई।
भरत के आगमन पर भी गुह ने उनकी सहायता की और राम की ओर से भरत का स्वागत किया। उनका प्रसंग 'सामाजिक भेद से परे भक्ति' का उदाहरण है — राम ने निषादराज को भाई के समान अपनाया।
नाते-रिश्ते
- मित्र: श्रीराम
- सखा: लक्ष्मण
प्रसिद्ध कथन
राम से: "हे नाथ, मेरा राज्य और जीवन आपके चरणों में अर्पित है; आज मेरा भाग्य सफल हुआ।" (भावानुवाद)
संबंधित
स्रोत: वाल्मीकि रामायण – अयोध्याकाण्ड; रामचरितमानस – अयोध्याकाण्ड