गोवर्धन
तीर्थ एवं स्थान
अन्य नाम: गिरिराज, गोवर्धन पर्वत
गोवर्धन उत्तर प्रदेश के मथुरा ज़िले में, गिरिराज पर्वत के रूप में स्थित है। यह ब्रजमंडल का केंद्रीय तीर्थ है और मथुरा से लगभग 22 किमी दूर है।
कथा के अनुसार भगवान कृष्ण ने ब्रजवासियों को इंद्र के पूजन के स्थान पर गिरिराज (गोवर्धन) की पूजा करने को कहा। क्रुद्ध इंद्र ने प्रलयकारी वर्षा की; तब कृष्ण ने सात दिन-रात गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठा उंगली पर धारण करके ब्रज की रक्षा की। इंद्र ने हार मानकर कृष्ण की स्तुति की और तभी से 'गोवर्धन पूजा' प्रारंभ हुई।
महात्व: कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा (गोवर्धन पूजा/अन्नकूट) पर यहाँ विशेष उत्सव होता है। गोवर्धन परिक्रमा (लगभग 21-22 किमी) का बड़ा महत्व है; दान-घाटा, मानसी गंगा और दानघाटी आदि स्थान इस परिक्रमा में पड़ते हैं।
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स्रोत: श्रीमद्भागवत पुराण; विष्णु पुराण