दुर्गा सप्तशती
ग्रंथ
अन्य नाम: दुर्गासप्तशती, देवी माहात्म्य, देवीमाहात्म्य, सप्तशती, चण्डी पाठ
रचयिता / कर्ता: वेदव्यास (मार्कण्डेय पुराण)
दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) मार्कण्डेय पुराण में स्थित देवी की महिमा का प्रसिद्ध ग्रंथ है। इसमें सात सौ श्लोक हैं, इसीलिए इसे 'सप्तशती' कहा जाता है, और यह तेरह अध्यायों में विभाजित है।
मुख्य विषय आदि-शक्ति दुर्गा द्वारा महिषासुर, मधु-कैटभ, शुम्भ-निशुम्भ तथा रक्तबीज आदि असुरों के वध की कथा है। ग्रंथ तीन चरित्रों में विभाजित है — प्रथम चरित्र (महिषासुर), मध्यम चरित्र (मधु-कैटभ आदि) और उत्तर चरित्र (शुम्भ-निशुम्भ)।
इसके साथ देवी कवच, अर्गला, कीलक, रात्रिसूक्त तथा अनेक स्तुतियाँ पढ़ी जाती हैं। पाठ से शत्रु-नाश, भय-निवारण, रोग-मुक्ति तथा ऐश्वर्य की प्राप्ति का फल बताया गया है।
महात्मा: शाक्त परंपरा का यह सर्वाधिक प्रचलित ग्रंथ है; नवरात्रि में इसका पाठ प्रमुख अनुष्ठान है।
प्रसिद्ध कथन
संबंधित
स्रोत: मार्कण्डेय पुराण, देवी माहात्म्य