छांदोग्य उपनिषद 6.2.1
रोज़ का श्लोक
अर्थ — हे सौम्य ! यह सब आरम्भ में सत् (सत्य-स्वरूप ब्रह्म) ही था, केवल एक ही, दूसरे रहित।
यह मंत्र सृष्टि के आरम्भ में एकमेव सत् के होने की बात कहता है। यह अद्वैत दर्शन का आधार-मंत्र है, जो बताता है कि अनेकता के पीछे एक ही सत्य है।
श्लोक
सदेव सोम्येदमग्र आसीदेकमेवाद्वितीयम्।
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स्रोत: छांदोग्य उपनिषद