बालकांड
ग्रंथ
अन्य नाम: बाल कांड
रचयिता / कर्ता: वाल्मीकि
बालकांड वाल्मीकि रामायण का पहला कांड है। इसमें सर्वप्रथम वाल्मीकि द्वारा नारद से रामकथा के विषय में पूछने, क्रौंच-वध के प्रसंग से काव्य-रचना की प्रेरणा और लव-कुश को कथा सिखाने का वर्णन है।
इसका मुख्य विषय अयोध्या नगरी, राजा दशरथ का पुत्रेष्टि-यज्ञ, कौशल्या, कैकेयी और सुमित्रा से श्रीराम, भरत, लक्ष्मण तथा शत्रुघ्न का जन्म, और बालकों की शिक्षा-दीक्षा है।
आगे विश्वामित्र का आगमन, राम-लक्ष्मण द्वारा ताड़का-वध, यज्ञ-रक्षा, अहल्या-उद्धार, धनुष-भंग और जनकपुरी में सीता-स्वयंवर तथा राम-सीता, लक्ष्मण-उर्मिला आदि का विवाह वर्णित है। परशुराम-संवाद और अयोध्या-वापसी से कांड का समापन होता है।
महात्मा: यह कांड रामकथा का आधार है और श्रीराम के दिव्य जन्म तथा बाल-चरित्र का स्रोत है।
प्रसिद्ध कथन
ततो यज्ञे समाप्ते तु ऋतूनां षट् समत्ययुः। ततश्च द्वादशे मासे चैत्रे नावमिके तिथौ॥ (श्रीराम जन्म, बालकांड)
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स्रोत: वाल्मीकि रामायण, बालकांड