आश्रमवासिक पर्व
ग्रंथ
अन्य नाम: आश्रमवासिकपर्व, आश्रमवासिक पर्व, पंचदश पर्व
रचयिता / कर्ता: वेदव्यास / वैशंपायन-सूत
आश्रमवासिक पर्व महाभारत का पंद्रहवाँ पर्व है, जिसमें धृतराष्ट्र और गांधारी अपने पुत्रों के शोक में वन (आश्रम) की ओर प्रस्थान करते हैं।
इसमें विदुर, कुंती, संजय और अन्य वृद्धजन भी वन जाते हैं। युधिष्ठिर और अन्य पांडव उनसे भेंट करने आते हैं।
इसमें विदुर का देह त्याग और धृतराष्ट्र, गांधारी तथा कुंती का वन में अग्नि-समाधि द्वारा शरीर त्याग का वर्णन है।
इसमें नारद का आगमन और परीक्षित तथा जनमेजय के भविष्य का संकेत भी है। यह पर्व वानप्रस्थ और संन्यास की परंपरा तथा मोह-त्याग को दर्शाता है।
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स्रोत: महाभारत, आश्रमवासिक पर्व