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अन्नपूर्णा उपनिषद

ग्रंथ

अन्य नाम: अन्नपूर्णोपनिषद्

रचयिता / कर्ता: अपौरुषेय / परंपरा-प्रसिद्ध

उपनिषदशाक्तअथर्ववेद

अन्नपूर्णा उपनिषद अन्नपूर्णा देवी और अन्न-तत्त्व का महत्व बताने वाला शाक्त उपनिषद है। इसमें अन्न को ब्रह्म कहा गया है।

यह उपनिषद अथर्ववेद से जुड़ा है और इसे शाक्त उपनिषदों में गिना जाता है। इसमें ज्ञान, वैराग्य और मोक्ष का उपदेश दिया गया है।

इसका मुख्य सिद्धांत है कि अन्न ही ब्रह्म है और अन्नपूर्णा देवी समस्त सृष्टि का पोषण करने वाली शक्ति हैं। प्रसिद्ध भाव है — अन्नं ब्रह्म (अन्न ही ब्रह्म है)। (भावानुवाद)

प्रसिद्ध कथन

अन्नं ब्रह्म — अन्न ही ब्रह्म है। (भावानुवाद)

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ब्रह्मशक्तिउपनिषद

स्रोत: अथर्ववेद