सुबाल उपनिषद
ग्रंथ
अन्य नाम: सुबालोपनिषद्
रचयिता / कर्ता: अपौरुषेय / परंपरा-प्रसिद्ध
सुबाल उपनिषद नारायण को जगत का मूल और ब्रह्म बताने वाला उपनिषद है। इसमें सृष्टि, पुरुषसूक्त और आत्मा-ब्रह्म की एकता का वर्णन है।
यह उपनिषद शुक्ल यजुर्वेद से जुड़ा है और इसे सामान्य तथा वैष्णव उपनिषदों में गिना जाता है। यह रामानुज के विशिष्टाद्वैत दर्शन का प्रमुख आधार माना जाता है।
इसका मुख्य सिद्धांत है कि नारायण ही सबके पिता, माता, शरण और लक्ष्य हैं तथा वही ब्रह्म हैं। प्रसिद्ध भाव है — नारायण ही इस जगत के मूल हैं। (भावानुवाद)
प्रसिद्ध कथन
सहस्रशीर्षा पुरुषः पुरुष एवेदं सर्वम् — नारायण ही सबके मूल हैं। (भावानुवाद)
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स्रोत: शुक्ल यजुर्वेद