योगयाज्ञवल्क्य
ग्रंथ
अन्य नाम: योगयाज्ञवल्क्यम्
रचयिता / कर्ता: परंपरा-प्रसिद्ध
योगयाज्ञवल्क्य योग-साहित्य का ग्रंथ है, जिसमें याज्ञवल्क्य और गार्गी के संवाद के रूप में योग-साधना और आत्मज्ञान का वर्णन है।
इसके रचयिता अज्ञात हैं और यह परंपरा-प्रसिद्ध है; याज्ञवल्क्य ऋषि के नाम से जुड़ा होने के कारण इसे उनकी परंपरा का माना जाता है। ग्रंथ में यम, नियम, आसन, प्राणायाम आदि अंग आते हैं।
विषय अष्टांग योग, ध्यान और मोक्ष है। योगयाज्ञवल्क्य योग-परंपरा के महत्वपूर्ण ग्रंथों में गिना जाता है और इसमें योग तथा वेदांत का समन्वय दिखता है।
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स्रोत: योगयाज्ञवल्क्य