सुश्रुत
आयुर्वेद, ज्योतिष एवं योग
अन्य नाम: सुश्रुत मुनि, शल्य-जनक
सुश्रुत आयुर्वेद की शल्यचिकित्सा परंपरा के जनक माने जाते हैं। उनकी रचना सुश्रुत संहिता शल्य-चिकित्सा का प्राचीनतम विस्तृत ग्रंथ है।
सुश्रुत संहिता में सूत्र, निदान, शारीर, चिकित्सा, कल्प और उत्तर — छह स्थान हैं। परंपरा के अनुसार इसका मूल ज्ञान धन्वंतरि से सुश्रुत को प्राप्त हुआ और नागार्जुन ने इसका प्रतिसंस्कार किया।
सुश्रुत संहिता में शस्त्र-कर्म, व्रण-चिकित्सा, प्रसूति, नेत्र-रोग और अनेक शल्य-प्रक्रियाओं का सूक्ष्म वर्णन है। इसमें तीन सौ से अधिक शल्य-विधियाँ तथा एक सौ बीस से अधिक शस्त्र बताए गए हैं।
प्रसिद्ध कथन
रोगमादौ परीक्षेत ततोऽनन्तरमौषधम्। — सुश्रुत संहिता
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स्रोत: सुश्रुत संहिता