सूर्य पुराण
ग्रंथ
अन्य नाम: सौर पुराण, सूर्य पुराण
रचयिता / कर्ता: परंपरा-प्रसिद्ध
सूर्य पुराण (सौर उपपुराण) अठारह उपपुराणों में गिना जाता है और इसमें सूर्य-उपासना तथा देव-कथाओं का वर्णन है।
इसमें ६९ अध्याय माने जाते हैं; यह स्वयं को ब्रह्म पुराण का 'खिल' (परिशिष्ट) बताता है और इसमें दो संहिताएँ मानी जाती हैं।
यद्यपि इसका उपदेश सूर्य द्वारा माना जाता है, फिर भी यह शिव और पार्वती की महिमा तथा काशी के तीर्थों का वर्णन करता है।
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स्रोत: Wikipedia (Saura Purana); Wikipedia (Upapurana)