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सुलभा

स्त्री-रत्न एवं विदुषियाँ

अन्य नाम: सुलभा, भिक्षुकी सुलभा

योगिनीदार्शनिकमहाभारत

सुलभा महाभारत-काल की योगिनी और दार्शनिक थीं, जो भिक्षुकी (संन्यासिनी) के रूप में पृथ्वी पर भ्रमण करती थीं।

वे ब्राह्मण कुल की थीं और योग-साधना में निपुण थीं; मोक्ष-धर्म का पालन करती हुई स्थान-स्थान घूमती थीं।

मिथिला के राजा जनक के विषय में सुनकर कि वे राज्य में रहते हुए भी मुक्त हैं, सुलभा उनकी परीक्षा करने पहुँचीं; योग-बल से उन्होंने जनक के शरीर में प्रवेश किया और उनसे मोक्ष पर शास्त्रार्थ किया। महाभारत के शांति पर्व (मोक्षधर्म पर्व) में यह संवाद है; सुलभा ने कहा कि मोक्ष केवल ज्ञान से मिलता है, संन्यास के बाहरी चिह्नों से नहीं—राजा और भिक्षु दोनों इस विषय में समान हैं।

नाते-रिश्ते

  • परीक्षित: जनक
  • आश्रम: भिक्षुकी (संन्यासिनी)

प्रसिद्ध कथन

राजसिंहासन और भिक्षुक की छड़ी—दोनों में बंधन समान है; मोक्ष केवल ज्ञान से मिलता है। (महाभारत – शांति पर्व – भावानुवाद)

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स्रोत: महाभारत – शांति पर्व