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उभयभारती

स्त्री-रत्न एवं विदुषियाँ

अन्य नाम: उभयभारती, भारती, उभय भारती

दार्शनिकविदुषीशंकर दिग्विजय

उभयभारती (भारती) आठवीं शताब्दी की महान विदुषी और दार्शनिक थीं।

वे मीमांसक विद्वान मंडन मिश्र की पत्नी थीं; परंपरा में उन्हें सरस्वती का अवतार माना जाता है। कुछ स्रोतों में वे कुमारिल भट्ट की बहन या संबंधी बताई जाती हैं।

आदि शंकराचार्य और मंडन मिश्र के प्रसिद्ध शास्त्रार्थ में उभयभारती निर्णायक (न्यायाधीश) बनीं; पति की पराजय के बाद उन्होंने स्वयं शंकराचार्य को चुनौती दी और कामशास्त्र पर प्रश्न किए। शंकर दिग्विजय परंपरा में यह प्रसंग प्रसिद्ध है; अंत में उन्होंने शंकराचार्य की श्रेष्ठता स्वीकार की और स्थानीय परंपरा में वे शारदा/सरस्वती के रूप में पूजित हैं।

नाते-रिश्ते

  • पति: मंडन मिश्र
  • संबंधी: कुमारिल भट्ट (कुछ स्रोत)

प्रसिद्ध कथन

मेरे पति का तो आधा ही तुमने जीता है; अर्धांगिनी के रूप में मुझसे शास्त्रार्थ किए बिना तुम्हारी विजय पूर्ण नहीं होगी। (शंकर दिग्विजय – भावानुवाद)

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सुलभागार्गी

स्रोत: परंपरा-प्रसिद्ध (शंकर दिग्विजय)