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स्रोतस्

आयुर्वेद, ज्योतिष एवं योग

अन्य नाम: शरीर-मार्ग, नाड़ी-मार्ग

आयुर्वेदशरीरमूल सिद्धांत

स्रोतस् का अर्थ है शरीर के सूक्ष्म मार्ग या नलिकाएँ, जिनके द्वारा धातुओं का संचार और पोषण होता है। ये शरीर के प्रत्येक अंग तक पहुँचते हैं।

चरक संहिता के विमानस्थान में स्रोतस् का विस्तृत वर्णन है — प्रत्येक धातु के स्रोतस् और उनके विकार के लक्षण बताए गए हैं। सुश्रुत संहिता ने इन्हें शरीर के मार्ग के रूप में वर्णित किया है।

स्रोतस् के अवरोध अर्थात स्रोतोरोध से धातुओं का संचार रुकता है और रोग उत्पन्न होते हैं। आम, दोष और मल इन मार्गों को अवरुद्ध करते हैं। पंचकर्म, दीपन और स्रोतोविशोधन से इन्हें खोला जाता है।

प्रसिद्ध कथन

(भावानुवाद) शरीर में जिन मार्गों से धातुओं का रस बहता है, वे स्रोतस् हैं; इनके अवरुद्ध होने से रोग होते हैं।

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धातुआमआयुर्वेद

स्रोत: चरक संहिता