धातु
आयुर्वेद, ज्योतिष एवं योग
अन्य नाम: सप्त धातु, शरीर-ऊतक
धातु वे सात मूल ऊतक हैं जो शरीर का निर्माण करते हैं — रस, रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा और शुक्र। ये एक-दूसरे को पोषण देकर क्रमशः बढ़ते हैं।
चरक संहिता और सुश्रुत संहिता — दोनों में धातुओं की सात-संख्या और उनके परस्पर पोषण-क्रम का वर्णन है। प्रत्येक धातु के साथ उसका धात्वाग्नि संबंधित है, जो उसे पचाकर अगली धातु को पोषण देता है।
धातुओं के विकृत होने पर उनसे उत्पन्न उपधातु और मल भी विकृत होते हैं। धातु-साम्य ही स्वास्थ्य है और धातु-वैषम्य से रोग होते हैं। रसायन, उचित आहार और व्यायाम से धातुओं का पोषण होता है।
प्रसिद्ध कथन
रसरक्तमांसमेदोस्थिमज्जाशुक्राणि धातवः। — शरीर के सात धातुओं का शास्त्रीय वचन
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स्रोत: चरक संहिता, सुश्रुत संहिता