आम
आयुर्वेद, ज्योतिष एवं योग
अन्य नाम: अपक्व पदार्थ, साम
आम का अर्थ है अपक्व या अपाच्य पदार्थ। जब जठराग्नि मंद होती है, तब भोजन ठीक से न पचकर एक चिपचिपा और दुर्गंधयुक्त पदार्थ बनाता है, जिसे आम कहते हैं।
चरक संहिता में आम को अनेक रोगों का कारण बताया गया है; यह दोषों के साथ मिलकर साम अवस्था उत्पन्न करता है। सुश्रुत संहिता में आम के लक्षण — अरुचि, भारीपन, अलसी तथा मल-मूत्र में अवरोध — वर्णित हैं।
आम स्रोतस् में रुककर वहाँ अवरोध उत्पन्न करता है और अम्लता, ज्वर, संधि-शूल तथा त्वचा-रोग आदि का हेतु बनता है। लंगन अर्थात उपवास, दीपन-पाचन औषधियाँ और पंचकर्म से आम का पाचन किया जाता है।
प्रसिद्ध कथन
(भावानुवाद) जो अन्न अपक्व रह जाए और दोषों के साथ मिलकर रोग का बीज बने, उसे आम कहते हैं।
संबंधित
स्रोत: चरक संहिता, सुश्रुत संहिता