सीमन्तोन्नयन
संस्कार एवं श्राद्ध-विधि
अन्य नाम: सीमन्तोन्नयन, सीमंत, सीमन्तोन्नयन संस्कार
सीमन्तोन्नयन गर्भ-संस्कारों में तीसरा संस्कार है। इसमें पत्नी का सीमन्त अर्थात् माँग को ऊपर की ओर किया जाता है, जो गर्भ की रक्षा और शुभता का प्रतीक है।
यह प्रायः गर्भ के चौथे, छठे या सातवें मास में किया जाता है। पति पत्नी के केशों को कंघी से ऊपर की ओर सँवारता है और मंत्रों के साथ शुभ आशीर्वाद देता है; इसमें मंगल गीत और सुहाग-सामग्री का प्रयोग भी होता है।
इसकी विधि आश्वलायन, पारस्कर और गोभिल आदि गृह्यसूत्रों में मिलती है। इसका महत्व गर्भस्थ शिशु की सुरक्षा, माता के स्वास्थ्य तथा संतान की दीर्घायु की कामना से जुड़ा है।
प्रसिद्ध कथन
हे ईश्वर! यह गर्भ सुरक्षित रहे और इसमें तेजस्वी, दीर्घायु संतान का विकास हो। (भावानुवाद)
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स्रोत: गृह्यसूत्र