पुंसवन संस्कार
संस्कार एवं श्राद्ध-विधि
अन्य नाम: पुंसवन, पुंसवनम्
पुंसवन गर्भावस्था का संस्कार है, जिसका अर्थ है गर्भ में पुंस अर्थात् वीर्यवान् संतान की स्थापना। यह गर्भाधान के बाद दूसरा संस्कार माना जाता है।
यह प्रायः गर्भधारण के तीसरे मास में किया जाता है। विधि में पत्नी को शुद्ध जल से स्नान कराकर औषधियुक्त जल या दूध का प्राशन कराया जाता है, नासिका के दाहिने छिद्र से औषधि डालने का विधान है और पति मंत्रोच्चार करता है।
इसका आधार गृह्यसूत्र और स्मृतियाँ हैं। इसका महत्व संतान की रक्षा, आरोग्य और कुल-वृद्धि की कामना से जुड़ा है।
प्रसिद्ध कथन
हे ईश्वर! इस गर्भ में वीर्यवान्, तेजस्वी और आरोग्यवान् संतान की स्थापना हो। (भावानुवाद)
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स्रोत: गृह्यसूत्र