शुल्बसूत्र
ग्रंथ
अन्य नाम: शुल्वसूत्र
रचयिता / कर्ता: परंपरा-प्रसिद्ध
शुल्बसूत्र वेदांग-साहित्य का वह अंग है जिसमें यज्ञ-वेदी बनाने की ज्यामितीय विधि बताई गई है। शुल्ब का अर्थ है मापने की रस्सी, और इन सूत्रों में रस्सी से नापकर वेदियों का निर्माण समझाया गया है।
बौधायन, आपस्तंब, कात्यायन और मानव शुल्बसूत्र प्रमुख हैं। ये प्राचीन भारत के गणितीय ज्ञान के अनुपम दस्तावेज हैं और परंपरा-प्रसिद्ध माने जाते हैं।
इनमें वर्ग, आयत, त्रिभुज और वृत्त की रचना तथा क्षेत्रफल-संबंधी नियम मिलते हैं। बौधायन शुल्बसूत्र में त्रिभुज की भुजाओं का प्रसिद्ध संबंध आता है, जो पाइथागोरस-प्रमेय का पूर्वरूप माना जाता है। शुल्बसूत्र प्राचीन भारतीय ज्यामिति और यज्ञ-तकनीक के महत्वपूर्ण प्रमाण हैं।
संबंधित
स्रोत: शुल्बसूत्र (बौधायन, आपस्तंब आदि)