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सारनाथ

तीर्थ एवं स्थान

अन्य नाम: सारनाथ, मृगदाव, ऋषिपत्तन

वाराणसीबुद्धप्रथम उपदेश

सारनाथ उत्तर प्रदेश में वाराणसी के निकट, गंगा और वरुणा नदियों के संगम के पास स्थित है। इसका प्राचीन नाम मृगदाव (ऋषिपत्तन) था। यहीं बुद्ध ने ज्ञान-प्राप्ति के बाद पाँच संन्यासियों को प्रथम उपदेश दिया — जिसे 'धर्मचक्र-प्रवर्तन' कहा जाता है — और संघ की स्थापना हुई।

यहाँ धमेक स्तूप, चौखंडी स्तूप, मूलगंध कुटी विहार तथा अशोक स्तंभ विद्यमान हैं; अशोक स्तंभ के शीर्ष पर स्थित सिंह-चतुर्मुख आगे चलकर भारत का राजचिह्न बना।

महात्व: बौद्ध धर्म के त्रिरत्न — बुद्ध, धर्म, संघ — तीनों का संबंध सारनाथ से है, इसीलिए इसे बौद्ध धर्म के जन्मस्थल के रूप में माना जाता है। आषाढ़ पूर्णिमा (धर्मचक्र दिवस) पर यहाँ उत्सव होता है।

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स्रोत: बौद्ध परंपरा; पुराण-साहित्य