एकं सद्विप्रा (ऋग्वेद 1.164.46)
रोज़ का श्लोक
अन्य नाम: एकं सद्विप्रा बहुधा वदन्ति
अर्थ — उसे इन्द्र, मित्र, वरुण और अग्नि कहते हैं; वही दिव्य सुपर्ण और गरुत्मान है। सत्य एक ही है, पर विद्वान उसे अनेक प्रकार से कहते हैं।
यह मंत्र भारत के धार्मिक एकता-दर्शन का आधार है — सत्य एक है, उसे भिन्न-भिन्न नामों से पुकारा जाता है। यह सर्वधर्म-समभाव का वैदिक प्रमाण है।
श्लोक
इन्द्रं मित्रं वरुणमग्निमाहुरथो दिव्यः स सुपर्णो गरुत्मान्।
एकं सद्विप्रा बहुधा वदन्ति॥
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स्रोत: ऋग्वेद