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पूर्णमदः शान्ति मंत्र

रोज़ का श्लोक

अन्य नाम: पूर्णमदः

शान्ति मंत्रब्रह्मपूर्णत्व

अर्थ — वह (ब्रह्म) पूर्ण है, यह (जगत) पूर्ण है; पूर्ण से ही पूर्ण उत्पन्न होता है। पूर्ण का पूर्ण को ग्रहण करके भी पूर्ण ही शेष रहता है।

यह पूर्णत्व का प्रसिद्ध शान्ति मंत्र है, जो ईशोपनिषद की शान्ति-पाठ के रूप में प्रचलित है। यह ब्रह्म की अपरिच्छिन्न (अखंड) पूर्णता का बोध कराता है।

श्लोक

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते। पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते॥

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स्रोत: यजुर्वेद