दिनचर्या
आयुर्वेद, ज्योतिष एवं योग
अन्य नाम: दैनिक चर्या, आहार-विहार
दिनचर्या का अर्थ है प्रातः जागरण से रात्रि-निद्रा तक की नियमित दैनिक क्रियाएँ। यह स्वस्थ व्यक्ति की आयु-रक्षा और रोग-निवारण का सरल उपाय है।
चरक संहिता के सूत्रस्थान में दिनचर्या का विस्तृत वर्णन है — ब्रह्ममुहूर्त में जागरण, दंतधावन, अभ्यंग, व्यायाम, स्नान और भोजन के नियम। सुश्रुत संहिता ने भी इसे स्वास्थ्य-रक्षा का साधन बताया है।
नियमित दिनचर्या से दोष संतुलित रहते हैं, अग्नि प्रबल होती है और मन शांत रहता है। अनियमित दिनचर्या से दोष विकृत होकर रोग उत्पन्न करते हैं। दिनचर्या आयुर्वेद की निवारक चिकित्सा का आधार है।
प्रसिद्ध कथन
ब्राह्मे मुहूर्ते उत्तिष्ठेत् स्वस्थो रक्षार्थमायुषः। — चरक संहिता, सूत्रस्थान
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स्रोत: चरक संहिता