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प्रवर

संस्कार एवं श्राद्ध-विधि

अन्य नाम: प्रवर, प्रवरम्, त्र्यार्षेय प्रवर

वंशविवाहगृह्यसूत्रऋषि

प्रवर का अर्थ है श्रेष्ठ। गोत्र के मूल और उसके बाद हुए महान् ऋषियों के नामों को प्रवर कहा जाता है।

प्रवर में प्रायः तीन ऋषियों के नाम लिए जाते हैं, कहीं एक, दो, पाँच या सात भी। अभिवादन और यज्ञ-संकल्प के समय त्र्यार्षेय प्रवरान्वित कहकर अपने प्रवर का उच्चारण किया जाता है; जिनका एक भी प्रवर समान हो, उनका परस्पर विवाह वर्जित माना जाता है।

इसका आधार गृह्यसूत्र और आपस्तम्ब आदि के वचन हैं। इसका महत्व गोत्र से भी सूक्ष्म वंश-पहचान और विवाह-नियम के निर्धारण में है।

प्रसिद्ध कथन

अभिवादये वसिष्ठ मैत्रावरुण कौण्डिन्य त्र्यार्षेय प्रवरान्वित कौण्डिन्यगोत्रः... (अभिवादन मंत्र का उदाहरण)

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गोत्रगृह्यसूत्रविवाह संस्कारऋषि

स्रोत: गृह्यसूत्र