पंढरपुर वारी
तीर्थ यात्राएँ
अन्य नाम: वारी, आषाढी वारी, वारकरी यात्रा
पंढरपुर वारी महाराष्ट्र की प्रसिद्ध वारकरी परम्परा है, जिसमें श्रद्धालु पैदल चलकर पंढरपुर में विठ्ठल के दर्शन करने जाते हैं। प्रमुख वारी आषाढ़ और कार्तिक की शुद्ध एकादशी को होती है।
आषाढी वारी में आलंदी से संत ज्ञानेश्वर की और देहू से संत तुकाराम की पालखी निकलती है, जिनके साथ लाखों वारकरी दिंडियों में चलते हैं। यह यात्रा लगभग इक्कीस दिन में पूरी होती है और पंढरपुर में चंद्रभागा (भीमा) नदी के तट पर सम्पन्न होती है।
यह परम्परा संत ज्ञानेश्वर, नामदेव, एकनाथ और तुकाराम आदि संतों से जुड़ी है, जिन्होंने नामस्मरण, समता और सेवा का संदेश दिया। वारकरी 'ज्ञानोबा-तुकाराम' के जयघोष, टाळ-मृदंग और अभंगों के साथ यात्रा करते हैं।
प्रसिद्ध कथन
पुंडलिक वरदे हरि विठ्ठल।
संबंधित
स्रोत: वारकरी संप्रदाय