जगन्नाथ रथ यात्रा
तीर्थ यात्राएँ
अन्य नाम: रथ यात्रा, गुंडिचा यात्रा, पुरी रथ यात्रा
जगन्नाथ रथ यात्रा पुरी में आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को होने वाली वार्षिक यात्रा है, जिसमें भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा अपने-अपने रथों पर बैठकर गुंडिचा मंदिर तक जाते हैं। तीनों रथ प्रत्येक वर्ष नए बनाए जाते हैं।
जगन्नाथ का रथ नंदीघोष, बलभद्र का तालध्वज और सुभद्रा का दर्पदलन कहलाता है। भगवान जगन्नाथ मंदिर से गुंडिचा मंदिर तक जाते हैं, वहाँ सात दिन रुकते हैं और फिर वापस लौटते हैं। यह यात्रा लगभग तीन किलोमीटर की है।
स्कन्द पुराण में कहा गया है कि रथ यात्रा में कीर्तन करते हुए गुंडिचा तक जाने वाला पुनर्जन्म से मुक्त हो जाता है। यह पर्व इस विश्वास का प्रतीक है कि भगवान स्वयं चलकर जनता के बीच आते हैं।
प्रसिद्ध कथन
जगन्नाथः स्वामी नयनपथगामी भवतु मे॥ (जगन्नाथाष्टकम्, आदि शंकराचार्य)
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स्रोत: स्कन्द पुराण