शास्त्रज्ञशास्त्रों के ग्रंथ, पात्र, कथाएँ, स्थान और शब्द — एक जगह

निंबार्क भाष्य

ग्रंथ

अन्य नाम: वेदांत पारिजात सौरभ, वेदान्त-पारिजात-सौरभ, ब्रह्मसूत्र भाष्य

रचयिता / कर्ता: निंबार्काचार्य

द्वैताद्वैतब्रह्मसूत्रभाष्य

यह ब्रह्मसूत्र पर निंबार्काचार्य द्वारा रचित भाष्य है, जिसे वेदांत-पारिजात-सौरभ कहा जाता है। ब्रह्मसूत्र बादरायण का सूत्र-ग्रंथ है।

निंबार्काचार्य द्वैताद्वैत (स्वाभाविक भेदाभेद) वेदांत संप्रदाय के प्रवर्तक आचार्य हैं। उनके अनुसार जीव और जगत् ब्रह्म से न पूर्णतः भिन्न हैं और न पूर्णतः अभिन्न।

भाष्य बहुत संक्षिप्त और सरल है, जिसमें प्रत्येक सूत्र का अर्थ तथा उसके उपनिषद्-प्रमाण का संकेत दिया गया है। यह राधा-कृष्ण उपासना वाले निंबार्क संप्रदाय का मूल ग्रंथ है और भेदाभेद सिद्धांत का प्रमुख आधार है।

प्रसिद्ध कथन

सर्वं खल्विदं ब्रह्म। (छांदोग्य उपनिषद)
(भावानुवाद) ब्रह्म जगत् का कारण है, और जीव तथा जगत् ब्रह्म से भेदाभेद रूप में जुड़े हैं — यही द्वैताद्वैत है।

संबंधित

ब्रह्मसूत्रवेदांतवल्लभ भाष्यमध्व भाष्यउपनिषद

स्रोत: वेदांत पारिजात सौरभ