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मनुस्मृति 8.15

रोज़ का श्लोक

अन्य नाम: धर्मो रक्षति रक्षितः

धर्मरक्षान्याय

अर्थ — मारा हुआ धर्म मारने वाले का नाश करता है और रक्षा किया हुआ धर्म रक्षक की रक्षा करता है। इसलिए धर्म का नाश नहीं करना चाहिए, कहीं नष्ट किया हुआ धर्म हमारा ही नाश न कर दे।

यह मनुस्मृति का अत्यंत प्रसिद्ध श्लोक धर्म की रक्षा का महत्त्व बताता है। धर्मो रक्षति रक्षितः — धर्म की रक्षा करने वाले की धर्म स्वयं रक्षा करता है।

श्लोक

धर्म एव हतो हन्ति धर्मो रक्षति रक्षितः। तस्माद्धर्मो न हन्तव्यो मा नो धर्मो हतोऽवधीत्॥

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स्रोत: मनुस्मृति