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राम रक्षा स्तोत्र (प्रारंभ)

रोज़ का श्लोक

अन्य नाम: चरितं रघुनाथस्य

रामस्तोत्ररक्षा

अर्थ — श्रीरघुनाथ का चरित सौ करोड़ विस्तार वाला है; उसका एक-एक अक्षर मनुष्यों के महापापों का नाश करने वाला है।

यह राम रक्षा स्तोत्र का प्रारंभिक श्लोक है, जिसकी रचना बुध कौशिक ऋषि ने की मानी जाती है। यह भगवान राम के चरित्र की महिमा और उसके पाठ की शक्ति बताता है।

श्लोक

चरितं रघुनाथस्य शतकोटि प्रविस्तरम्। एकैकमक्षरं पुंसां महापातकनाशनम्॥

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स्रोत: राम रक्षा स्तोत्र