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मांडूक्य उपनिषद 1

रोज़ का श्लोक

ॐब्रह्मप्रणव

अर्थ — ॐ यह अक्षर ही यह सब कुछ है। इसका विस्तृत वर्णन यह है — भूत, वर्तमान और भविष्य सब ॐकार ही है।

मांडूक्य उपनिषद का प्रथम मंत्र ॐ की महिमा बताता है। सम्पूर्ण जगत ॐ में समाया है; इसलिए ॐ को ब्रह्म का प्रतीक कहा गया है।

श्लोक

ॐ इत्येतदक्षरमिदं सर्वं तस्योपव्याख्यानं भूतं भवद्भविष्यदिति सर्वमोङ्कार एव।

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स्रोत: मांडूक्य उपनिषद