किरातार्जुनीय
ग्रंथ
अन्य नाम: किरातार्जुनीयम्
रचयिता / कर्ता: भारवि
किरातार्जुनीय महाकाव्य भारवि की रचना है, जिसमें महाभारत की कथा से लिया गया अर्जुन का शिव-सान्निध्य और पाशुपतास्त्र की प्राप्ति का प्रसंग है।
रचयिता भारवि हैं। ग्रंथ अठारह सर्गों में है और किरात शब्द यहाँ शिव के लिए आया है, जो व्याध-वेश में अर्जुन की परीक्षा लेते हैं।
विषय तपस्या, वीरता और शिव-भक्ति है। किरातार्जुनीय की अलंकार-योजना और भाषा-गांभीर्य के कारण इसे भारवि की प्रतिभा का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है और यह महाकाव्य-परंपरा में उच्च स्थान रखता है।
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स्रोत: किरातार्जुनीय (भारवि)