कबीर पंथ
सम्प्रदाय एवं मठ
अन्य नाम: कबीर सम्प्रदाय, कबीर मत
कबीर पंथ संत कबीर द्वारा प्रवर्तित वह भक्ति परंपरा है जिसमें निर्गुण (निराकार) राम की उपासना की जाती है। यहाँ मूर्ति-पूजा तथा बाह्य आडंबर का विरोध किया जाता है। इसके इष्ट राम हैं, जो निर्गुण ब्रह्म के रूप में माने जाते हैं।
इसके संस्थापक कबीर (लगभग पंद्रहवीं शताब्दी) माने जाते हैं, जो वाराणसी के कबीर चौरा से जुड़े हैं। प्रमुख स्थल कबीर चौरा तथा मगहर हैं।
कबीर पंथ ने जाति-पाँति तथा धार्मिक कर्मकांड का खंडन करते हुए सरल भक्ति का प्रचार किया। कबीर की साखियाँ तथा पद इस परंपरा के मुख्य ग्रंथ हैं। इसका प्रभाव भारत के अनेक भक्ति आंदोलनों पर पड़ा।
प्रसिद्ध कथन
काल करे सो आज कर, आज करे सो अब। पल में प्रलय होएगी, बहुरि करेगा कब॥
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स्रोत: परंपरा-प्रसिद्ध