शास्त्रज्ञग्रंथ, पात्र, कथाएँ, स्थान एवं शब्द — एक जगह

दशनामी सम्प्रदाय

सम्प्रदाय एवं मठ

अन्य नाम: दशनामी संन्यासी, एकदंडी संन्यासी

शंकराचार्यअद्वैतसंन्यासअखाड़ा

दशनामी सम्प्रदाय आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित संन्यासी परंपरा है। इसमें संन्यासियों को दस नामों में विभाजित किया गया है। ये दस नाम हैं — गिरि, पुरी, भारती, सरस्वती, वन, अरण्य, तीर्थ, आश्रम, पर्वत तथा सागर।

यह परंपरा अद्वैत वेदांत पर आधारित है और चारों मठों से जुड़ी है। शंकराचार्य के चार प्रमुख शिष्यों से इसकी शाखाएँ चलीं। इसके अनुयायी शंकराचार्य को अपना परम आचार्य मानते हैं।

दशनामी संन्यासी अखाड़ों में संगठित हैं और धर्म-प्रचार, शिक्षा तथा तीर्थरक्षा में सक्रिय रहते हैं। कुम्भ मेले में इनकी भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण रही है।

प्रसिद्ध कथन

ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या जीवो ब्रह्मैव नापरः

संबंधित

वेदांतस्मार्त सम्प्रदायज्योतिर्मठ (बद्रीनाथ)शृंगेरी शारदा पीठ

स्रोत: परंपरा