आदित्य हृदय स्तोत्र (प्रारंभ)
रोज़ का श्लोक
अन्य नाम: आदित्य हृदय स्तोत्र
अर्थ — तब युद्ध से थके, चिन्ता में स्थित और सामने खड़े युद्ध के लिए तैयार रावण को देखकर (अगस्त्य मुनि ने राम से कहा)।
यह आदित्य हृदय स्तोत्र का प्रारंभिक श्लोक है, जो वाल्मीकि रामायण के युद्धकाण्ड में आता है। युद्ध से थके श्रीराम को अगस्त्य मुनि ने सूर्य-स्तुति का यह स्तोत्र सुनाया था।
श्लोक
ततो युद्धपरिश्रान्तं समरे चिन्तया स्थितम्।
रावणं चाग्रतो दृष्ट्वा युद्धाय समुपस्थितम्॥
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स्रोत: आदित्य हृदय स्तोत्र