अतिकाय
रामायण एवं रामचरितमानस
अन्य नाम: अतिकाया
अतिकाय रावण और उसकी पत्नी धन्यमालिनी का पुत्र था। वह पर्वत के समान विशालकाय और महापराक्रमी राक्षस था।
कथा के अनुसार उसने घोर तप से ब्रह्मा को प्रसन्न किया और देव-दानवों के लिए अवध्यत्व तथा एक दिव्य कवच प्राप्त किया। वह सब अस्त्रों का ज्ञाता और रथ-युद्ध में निपुण था।
युद्धकाण्ड में विभीषण ने राम को बताया कि अतिकाय ब्रह्मा के कवच के कारण साधारण अस्त्रों से नहीं मारा जा सकता। तब लक्ष्मण ने ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया और उसका वध किया। अतिकाय की मृत्यु रावण की सेना के लिए बड़ी क्षति थी।
नाते-रिश्ते
- पिता: रावण
- माता: धन्यमालिनी
- वधकर्ता: लक्ष्मण
प्रसिद्ध कथन
मुझे बालक जानकर तुच्छ न समझो; संग्राम में मुझे मृत्यु ही जानो। (भावानुवाद)
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स्रोत: वाल्मीकि रामायण – युद्धकाण्ड