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अमृतबिंदु उपनिषद

ग्रंथ

अन्य नाम: अमृतबिन्दु उपनिषद, अमृतबिन्दूपनिषद्

रचयिता / कर्ता: अपौरुषेय / परंपरा-प्रसिद्ध

उपनिषदयोगवेदांत

अमृतबिंदु उपनिषद मन की शुद्धि और ध्यान पर केंद्रित लघु उपनिषद है। अमृतबिंदु का अर्थ है — अमृत की बूँद, अर्थात् ब्रह्म का सूक्ष्म स्वरूप।

यह उपनिषद मुख्यतः अथर्ववेद से जुड़ा है, पर कहीं इसे कृष्ण यजुर्वेद से भी जोड़ा जाता है। यह बिंदु उपनिषदों में से एक है।

इसका मुख्य सिद्धांत है कि मन ही बंधन और मोक्ष का कारण है — विषयों में आसक्त मन बाँधता है और निर्विषय मन मुक्त करता है। प्रसिद्ध वाक्य है — मन एव मनुष्याणां कारणं बन्धमोक्षयोः।

प्रसिद्ध कथन

मन एव मनुष्याणां कारणं बन्धमोक्षयोः । बन्धाय विषयासक्तं मुक्त्यै निर्विषयं स्मृतम् ॥
मनो हि द्विविधं प्रोक्तं शुद्धं चाशुद्धमेव च ।

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स्रोत: अथर्ववेद / कृष्ण यजुर्वेद