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अक्षय तृतीया

व्रत एवं त्योहार

अन्य नाम: आखा तीज, अक्षय्या तृतीया

पर्वविष्णुवैशाखतृतीया

अक्षय तृतीया को 'अक्षय' अर्थात् कभी क्षय न होने वाले पुण्य का दिन माना जाता है।

यह वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को, सामान्यतः अप्रैल-मई में आती है।

विधि में विष्णु-पूजन, दान-पुण्य, स्वर्ण-क्रय और पवित्र स्नान शामिल हैं। मान्यता है कि इसी दिन सत्ययुग का आरंभ, गंगा का अवतरण और परशुराम का जन्म हुआ। यह पर्व शुभ कार्यों और अक्षय पुण्य का प्रतीक है।

प्रसिद्ध कथन

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।

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विष्णुगंगापरशुराम

स्रोत: परंपरा-प्रसिद्ध / भविष्य पुराण