यज्ञोपवीत
संस्कार एवं श्राद्ध-विधि
अन्य नाम: यज्ञोपवीत, जनेऊ, ब्रह्मसूत्र, उपवीत
यज्ञोपवीत अर्थात् जनेऊ कपास के सूतों से बना पवित्र सूत्र है, जिसे उपनयन संस्कार में धारण कराया जाता है। यह विद्या, तप और संयम का प्रतीक है।
जनेऊ में तीन सूत्र होते हैं, जो गायत्री मंत्र के तीन चरणों तथा देव-ऋण, ऋषि-ऋण और पितृ-ऋण के प्रतीक माने जाते हैं। इसे बाएँ कंधे के ऊपर और दाहिनी भुजा के नीचे धारण किया जाता है; ब्रह्मचारी तीन और गृहस्थ छह सूत्र धारण करता है।
इसका आधार गृह्यसूत्र और स्मृतियाँ हैं। यज्ञोपवीत आजीवन धारण किया जाता है और इसका महत्व आत्म-शुद्धि तथा तीनों ऋणों के स्मरण में है।
प्रसिद्ध कथन
ॐ यज्ञोपवीतं परमं पवित्रं प्रजापतेर्यत्सहजं पुरस्तात्। आयुष्यमग्र्यं प्रतिमुञ्च शुभ्रं यज्ञोपवीतं बलमस्तु तेजः॥
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स्रोत: गृह्यसूत्र