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वाजसनेयी शाखा

ग्रंथ

अन्य नाम: वाजसनेयी संहिता शाखा, शुक्ल यजुर्वेद शाखा

रचयिता / कर्ता: याज्ञवल्क्य / परंपरा-प्रसिद्ध

वेदशाखायजुर्वेद

वाजसनेयी शाखा शुक्ल (श्वेत) यजुर्वेद की शाखा है; शुक्ल यजुर्वेद को 'वाजसनेयी संहिता' भी कहा जाता है।

परम्परा के अनुसार याज्ञवल्क्य ने सूर्य (वाजी/अश्व रूप) से यजुर्वेद प्राप्त किया, इसीलिए इसका नाम वाजसनेयी पड़ा।

इसकी दो प्रमुख शाखाएँ — माध्यंदिन और काण्व — प्रचलित हैं; शतपथ ब्राह्मण तथा ईशावास्य उपनिषद इससे जुड़े हैं।

प्रसिद्ध कथन

ईशा वास्यमिदं सर्वं यत्किञ्च जगत्यां जगत्। तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा मा गृधः कस्यस्विद्धनम्॥ (ईशावास्य उपनिषद १)

संबंधित

यजुर्वेदमाध्यंदिन शाखाकाण्व शाखाशतपथ ब्राह्मण

स्रोत: vedicheritage.gov.in (Yajurveda); encyclopedia.com (Yajur Veda)